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YouTube, Google Maps, X, Spotify और OpenWeatherMap में क्या समानता है? आप इनके कंटेंट को इनके अपने प्लेटफ़ॉर्म से बाहर भी एम्बेड कर सकते हैं। यह एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस (API) की वजह से मुमकिन हो पाता है।
असल में, API दो तरह के सॉफ़्टवेयर के बीच संवाद का ज़रिया होते हैं। उदाहरण के लिए, आपकी वेबसाइट और वह Spotify प्लेलिस्ट, जिसे आप एम्बेड करना चाहते हैं। ये डिजिटल टूल्स को बड़े पैमाने पर लोगों के लिए उपलब्ध कराते हैं। लेकिन किसी सीमित प्रवेश वाली इमारत की तरह, इनके गलत इस्तेमाल से बचने के लिए आपको यह तय करना होता है कि इनका एक्सेस किसे दिया जाए। यहीं पर API की काम आती हैं।
API की क्या होती है?
API की एक खास पहचान कोड होता है, जो किसी एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस (API) को भेजे गए आपके अनुरोधों की पुष्टि करता है। API तकनीक की मदद से किसी सॉफ़्टवेयर प्रोडक्ट के अलग-अलग वर्शन थर्ड-पार्टी वेबसाइटों पर दिखाए जा सकते हैं।
अगर आपने कभी किसी ब्लॉग पर Spotify प्लेलिस्ट का प्ले बटन दबाया है या किसी होटल की वेबसाइट पर Google Maps विजेट के साथ इंटरैक्ट किया है, तो आपने API का इस्तेमाल किया है। साथ ही, उस वेबसाइट ने API और उसके डेटा को एक्सेस करने के लिए API की का इस्तेमाल किया था।
API की यह तय करके इंटरफ़ेस को सुरक्षित रख सकती हैं कि सिर्फ़ चुनिंदा यूज़र्स या अधिकृत ऐप ही API को एक्सेस करके उसके साथ इंटरैक्ट कर सकें। कोई खास API की या प्राइवेट API, सेवाओं या डेटा के एक्सेस को नियंत्रित करती है। यह यूज़र की पहचान की पुष्टि करने का एक तरीका है, जिससे यह जाँचा जाता है कि किसी व्यक्ति या संस्था के पास उस जानकारी को एक्सेस करने की अनुमति है या नहीं।
पब्लिक बनाम प्राइवेट API की
API की प्रोजेक्ट्स की पहचान कर सकती हैं, उन्हें अनुमति दे सकती हैं, और एप्लिकेशन के इस्तेमाल को मैनेज कर सकती हैं। इनकी मदद से API प्रोवाइडर्स यह भी तय कर सकते हैं कि कौन इस जानकारी को एक्सेस कर सकता है और कितनी बार। इससे स्पैमिंग या डेटा उल्लंघन जैसे गलत इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलती है। मुख्य रूप से API दो तरह की कॉल्स को नियंत्रित करते हैं: पब्लिक की और प्राइवेट की। सुरक्षा और गोपनीयता के नज़रिए से आइए इन दोनों पर एक नज़र डालते हैं:
सुरक्षा
पब्लिक ऐप्स के इस्तेमाल में आमतौर पर बेहद गोपनीय डेटा के लेन-देन की ज़रूरत नहीं होती। इसलिए पब्लिक API की सबसे मज़बूत सुरक्षा प्रदान नहीं करतीं।
प्राइवेट API की ज़्यादा सुरक्षित होती हैं। आमतौर पर इनका इस्तेमाल संवेदनशील डेटा को एक्सेस करने या किसी API के भीतर ज़रूरी कार्रवाइयां को अंजाम देने के लिए किया जाता है। अक्सर ये प्रोप्राइटरी ऐप्स या इन-हाउस रिकॉर्ड-कीपिंग टूल्स का हिस्सा होती हैं, जिन्हें सुरक्षा उद्देश्यों के लिए API की की ज़रूरत पड़ती है। ऐप के इस्तेमाल को बेहतर ढंग से ट्रैक करने और अनधिकृत एक्सेस रोकने के लिए प्राइवेट API की के साथ किसी सीक्रेट टोकन या अन्य सुरक्षा प्रणालियों की भी ज़रूरत पड़ सकती है। ये अलग-अलग मानदंडों के आधार पर डेटा के खास हिस्सों वाले लॉग्स को फ़िल्टर करने की सुविधा भी देती हैं, ताकि अधिकृत ऐप्स के व्यवहार को ट्रैक किया जा सके और किसी संभावित गलत इस्तेमाल का पता लगाया जा सके।
गोपनीयता
कोई भी पब्लिक API की को एक्सेस कर सकता है। किसी API कॉल के दौरान आपको रिक्वेस्ट हेडर या URL क्वेरी स्ट्रिंग में बिना किसी क्रम के बनाए गए अक्षर दिखाई दे सकते हैं। अगर आप किसी एम्बेड किए गए YouTube वीडियो के लंबे URL को ध्यान से देखें, तो आपको अंत में खास API की नज़र आ सकती हैं।
प्राइवेट API की को किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए। ऐप इन की को सुरक्षित ढंग से स्टोर करती है।
API की कैसे काम करती हैं
आपके एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस की सुरक्षा सुनिश्चित करने में API की एहम भूमिका निभाती हैं। ये एक्सेस को कंट्रोल करती हैं, ताकि सिर्फ़ स्वीकृत यूज़र्स और ऐप्स ही किसी API में मौजूद संवेदनशील डेटा को एक्सेस कर सकें। आगे संक्षेप में बताया गया है कि API की यूज़र्स की पहचान करके उन्हें एक्सेस कैसे देती हैं:
जेनरेशन
API प्रोवाइडर हर उस यूज़र या ऐप के लिए अक्षरों और अंकों की एक स्ट्रिंग बनाता है, जिसे API एक्सेस करने की ज़रूरत होती है। यह खास API की एक क्रेडेंशियल की तरह काम करती है और यह साबित करती है कि अनुरोध किसी अधिकृत स्रोत से आया है।
इस बारे में और जानने के लिए आप इस शॉर्ट वीडियो को देख सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर सबटाइटल्स ऑन कर लें (ऑटो जेनरेट)।
ऑथेंटिकेशन
जब कोई यूज़र API रिक्वेस्ट भेजता है, तो उसमें API की शामिल होती है। API सर्वर इस की की जाँच अधिकृत की वाले डेटाबेस से करता है। अगर की मान्य है, तो सर्वर API का एक्सेस दे देता है। अमान्य या गायब की के मामले में API प्रोवाइडर एक्सेस देने से मना कर देता है।
ऐप्लिकेशन एक्सेस
API रिक्वेस्ट स्वीकार होने पर API सर्वर अपने रेसोर्सेस का एक्सेस दे देता है। एक्सेस और API के इस्तेमाल का स्तर की को मिली अनुमतियों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर API की अनुरोधकर्ता की पहचान डेवलपर अकाउंट के तौर पर करती है, तो सर्वर उसे पूरा एक्सेस दे सकता है। अगर की से पता चलता है कि ट्रैफिक किसी थर्ड-पार्टी ऐप से आ रहा है, तो उसे API की सेवाओं का सीमित एक्सेस मिल सकता है।
रेट लिमिटिंग
गलत इस्तेमाल रोकने और सभी को उचित अवसर देने के लिए API प्रोवाइडर अक्सर रेट लिमिटिंग लागू करते हैं। इसके तहत यह सीमा तय की जाती है कि कोई ऐप एक निश्चित अवधि में कितनी बार रिक्वेस्ट भेज सकती है। इससे API की खपत उचित स्तर पर बनी रहती है। रेट लिमिटिंग यह सुनिश्चित करती है कि कई अलग-अलग यूज़र्स और ऐप्स इसे एक्सेस कर पाते हैं।
सुरक्षा
API की ऑथेंटिकेशन का एक बुनियादी तरीका हैं। ट्रैफिक की पहचान करने और सुरक्षा में सुधार लाने के लिए आप इनके साथ IP वाइटलिस्टिंग, एन्क्रिप्शन, या OAuth टोकन जैसी अन्य सुरक्षा प्रणालियों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आपको हमेशा API की को संवेदनशील जानकारी मानकर उन्हें गोपनीय रखना चाहिए। इन्हें कभी भी सार्वजनिक रूप से शेयर न करें या फिर ऐप्स के कोड में हार्ड कोड न करें।
API की के आम इस्तेमाल
- एक्सेस नियंत्रित करना
- यूज़र्स को अनुमति देना
- इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करना
- अनधिकृत ट्रैफ़िक को रोकना
- इंटीग्रेशन और ऐप से जुड़े कामों को ऑटोमेट करना
सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर API का एक्सेस नियंत्रित करने, सुरक्षा बनाए रखने, और API इंटीग्रेशन को आसान बनाने के लिए API की का इस्तेमाल करते हैं। ये की डेटा चुराने वालों और API पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ डाल सकने वाली थर्ड-पार्टी ऐप्स के खिलाफ़ सुरक्षा की एक अहम परत प्रदान करती हैं। API की के सबसे आम इस्तेमाल नीचे दिए गए हैं:
एक्सेस नियंत्रित करना
API की किसी API के डेटा या सेवाओं का एक्सेस नियंत्रित करती हैं। इससे सिर्फ़ अधिकृत ऐप्स ही API को कॉल कर पाती हैं। जब कोई API प्रोड्यूसर अनुरोध करने वाली किसी ऐप को की देता है, तो वह उस ऐप को अपनी सेवाओं के साथ इंटरैक्ट करने की अनुमति दे रहा होता है। उदाहरण के लिए, डेटा प्राप्त करना या कुछ खास कार्रवाइयां करना।
संवेदनशील डेटा को सुरक्षित रखने में प्राइवेट API की खासतौर पर एक एहम भूमिका निभाती हैं, जबकि पब्लिक API की कम संवेदनशील कामों के लिए उपयुक्त होती हैं। Google Cloud Platform Console जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर प्रोजेक्ट API की डेवलपर्स को अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के आधार पर एक्सेस नियंत्रित करने की अनुमति देती हैं।
यूज़र्स को अनुमति देना
सुरक्षित ऑथराइज़ेशन के लिए API की को ऑथेंटिकेशन टोकन के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके चलते सिर्फ़ प्रमाणित और अधिकृत यूज़र्स ही API के साथ इंटरैक्ट कर पाते हैं। की के इस्तेमाल से अज्ञात ट्रैफ़िक पर रोक लग जाती है और संभावित रूप से नुकसानदेह गतिविधियों से सुरक्षा मिलती है, फिर चाहे उसके लिए सुरक्षित ऑथेंटिकेशन टोकन की ज़रूरत हो या न हो।
इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करना
किसी API कॉल के पीछे कौन-सा यूज़र या ऐप है, यह ट्रैक करके API की इस्तेमाल के पैटर्न्स पहचानने में API प्रोवाइडर्स की मदद करती हैं। इससे प्रोवाइडर ऐप के इस्तेमाल पर नज़र रख सकते हैं, रेट लिमिट्स तय कर सकते हैं, और अपनी समूची सेवा में सुधार ला सकते हैं। उदाहरण के लिए, YouTube API की यह पहचानती हैं कि कोई खास ऐप वीडियो या डेटा को कितनी बार एक्सेस करती है। इसी तरह, Google Maps API की लोकेशन डेटा के अनुरोधों को ट्रैक कर सकती हैं।
अनधिकृत ट्रैफ़िक को रोकना
API की सिर्फ़ मान्य API की वाले अनुरोधों को प्रोसेस करके अज्ञात ट्रैफ़िक को रोक सकती हैं। प्राइवेट API की यह सुनिश्चित करती हैं कि सिर्फ़ वैध ट्रैफ़िक को ही एक्सेस मिले। साथ ही, वे संभावित रूप से नुकसानदेह गतिविधियों को रोकने के लिए अनाधिकृत अनुरोधों को ब्लॉक भी कर देती हैं।
इंटीग्रेशन और ऐप से जुड़े कामों को ऑटोमेट करना
API की के ज़रिए ऐसे सॉफ़्टवेयर या सिस्टम के कामों को ऑटोमेट किया जा सकता है, जिन्हें थर्ड-पार्टी सेवाओं के साथ इंटीग्रेट करने की ज़रूरत होती है। उदाहरण के लिए, बाहरी स्रोतों से डेटा अपने आप प्राप्त करने के लिए डेवलपर्स API की का इस्तेमाल करते हैं। जैसे, YouTube API की के ज़रिए वीडियो डेटा को किसी ऐप में लाया जा सकता है। API की को सही ढंग से मैनेज करने से ये इंटीग्रेशन सुरक्षित और भरोसेमंद बनी रहती हैं।
API की इस्तेमाल करने के बेहतरीन तरीके
API की का सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण यूज़र्स के अनधिकृत एक्सेस को रोकता है। साथ ही, इससे API कॉल्स और प्रोजेक्ट की अनुमतियों पर आपका नियंत्रण भी बना रहता है। API की का इस्तेमाल करते समय इन तरीकों को अपनाकर देखें:
1. अपनी API की को सुरक्षित रखें: अपनी ऐप में API की को कभी भी सादे टेक्स्ट के तौर पर स्टोर न करें। उन्हें सुरक्षित रखने के लिए एनवायरनमेंट वेरिएबल्स या एन्क्रिप्टेड कॉन्फ़िगरेशन फ़ाइलों जैसे सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करें।
2. जितना हो सके, एक्सेस सीमित रखें: API की को सिर्फ़ उतनी ही अनुमतियाँ दें, जितनी उनके तय कामों को अंजाम देने के लिए ज़रूरी हों। बहुत ज़्यादा एक्सेस देने से अनचाहे नतीजे सामने आ सकते हैं।
3. अपनी API की को नियमित रूप से बदलते रहें: जिस तरह इंटरनेट यूज़र्स को समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहना चाहिए, वैसे ही सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर को भी अनधिकृत एक्सेस के जोखिम को कम करने के लिए समय-समय पर API की फिर से बनानी चाहिए।
4. की के इस्तेमाल पर नज़र रखें: संभावित सुरक्षा उल्लंघनों या अनधिकृत एक्सेस का पता लगाने के लिए API की के इस्तेमाल के पैटर्न पर नज़र रखें।
5. रेट लिमिटिंग लागू करें: गलत इस्तेमाल रोकने और सभी को उचित एक्सेस देने के लिए यह तय कर दें कि कोई यूज़र एक तय अवधि में API की के ज़रिए कितने अनुरोध भेज सकता है। ऐसा करने से अनुरोधों की बाढ़ आने पर आपका सॉफ़्टवेयर क्रैश नहीं होगा।
6. API की मैनेजमेंट टूल्स का इस्तेमाल करें: की बनाने, उन्हें स्टोर करने, उनमें बदलाव करने, और उन्हें कैंसल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए खास API की मैनेजमेंट टूल्स के इस्तेमाल पर विचार करें।
API की क्या है: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
API की कैसे स्टोर की जाती हैं?
API की को सुरक्षित रूप से स्टोर करें। ऐसा करने के लिए एनवायरनमेंट वेरिएबल्स, एन्क्रिप्टेड कॉन्फ़िगरेशन फ़ाइलों, या खास API की मैनेजमेंट टूल्स का इस्तेमाल करके देखें। API की को कभी भी सोर्स कोड में हार्ड कोड न करें।
API की क्या करती है?
API की किसी ऐप को API के डेटा या सेवाओं को एक्सेस करने और उनके साथ इंटरैक्ट करने के लिए प्रमाणित और अधिकृत करती है। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि सिर्फ़ स्वीकृत यूज़र्स, फिर चाहे वे कोई व्यक्ति हों या कोई ऐप, ही API अनुरोध कर सकें।
API की की ज़रूरत किसे होती है?
अगर आपको किसी वेब-आधारित एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस (API) के डेटा या फ़ंक्शनैलिटी को एक्सेस करना है, तो वह एक्सेस पाने के लिए आपको API की की ज़रूरत होगी।

