ऑनलाइन बिज़नेस खरीदना आपको पैसिव इनकम का एक स्रोत दे सकता है या शुरू से नया बिज़नेस शुरू करने की तुलना में आपको पहले से बनी हुई नींव दे सकता है।
हजारों वेबसाइट और ईकॉमर्स स्टोर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन हर ऑनलाइन बिज़नेस एक अच्छा निवेश नहीं होता। यह सुनिश्चित करने के लिए अच्छी तरह रिसर्च और जाँच-पड़ताल करना जरूरी है कि आप सुरक्षित और सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं।
आगे जानें कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए बिज़नेस कैसे खरीदें, कहाँ खरीदें और किसी बिज़नेस को खरीदने पर विचार क्यों करें।
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बिज़नेस कैसे खरीदें
ऑनलाइन बिज़नेस खरीदने के लिए कुछ सामान्य चरण होते हैं। इनमें मार्केटप्लेस पर बिज़नेस खोजना, उसकी संपत्तियों और वित्तीय स्थिति की जाँच करना और बिक्री की शर्तों पर बातचीत करना शामिल है।
खरीदने के लिए बिज़नेस का प्रकार चुनें
बिज़नेस खरीदने की तलाश शुरू करने से पहले तय करें कि आप किस तरह का बिज़नेस खरीदना चाहते हैं। बिक्री के लिए उपलब्ध कुछ बिज़नेस अच्छी स्थिति में हो सकते हैं और उनमें लगातार ट्रैफिक व बिक्री हो सकती है। वहीं कुछ बिज़नेस लंबे समय से निष्क्रिय हो सकते हैं या उन्हें दोबारा व्यवस्थित करने की जरूरत हो सकती है।
क्या आप ऐसा बिज़नेस खरीदना चाहते हैं जिसमें सुधार की जरूरत है, या ऐसा बिज़नेस जो पहले से सुचारू रूप से चल रहा है?
- शुरुआती चरण या निष्क्रिय बिज़नेस: इन्हें दोबारा खड़ा करने और विकसित करने में आपका ज्यादा समय और मेहनत लग सकती है, लेकिन इनमें आगे चलकर अच्छा विकास करने की संभावना हो सकती है।
- स्थापित बिज़नेस: ये आम तौर पर ज्यादा स्थिर होते हैं और आपके निवेश पर जल्दी रिटर्न देने की स्थिति में हो सकते हैं, लेकिन इनकी बिक्री कीमत भी आम तौर पर अधिक होती है।
2015 में Snapdeal द्वारा डिजिटल पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म FreeCharge का अधिग्रहण इस बात का मुख्य उदाहरण है कि कंपनियां सिर्फ़ मौजूदा बिक्री के लिए बिज़नेस नहीं खरीदतीं, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य FreeCharge के विशाल यूज़र बेस, टेक्नोलॉजी और टीम को जोड़कर अपने कारोबार को तेज़ी से स्केल करना था, यानी किसी बिज़नेस का अधिग्रहण तात्कालिक कमाई से कहीं अधिक भविष्य के रणनीतिक विकास के लिए किया जाता है।
कुछ बिज़नेस पहले ही अपने टोटल एड्रेसेबल मार्केट के बड़े हिस्से तक पहुँच चुके होते हैं। ऐसे बिज़नेसेज़ में नए प्रोडक्ट या सर्विस के बिना आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित हो सकती है। दूसरी ओर, कुछ बिज़नेस हाल ही में शुरू हुए हो सकते हैं या अभी स्टार्टअप चरण में हो सकते हैं।
बिक्री के लिए उपलब्ध बिज़नेस खोजें
एक बार जब आप तय कर लें कि किस तरह का बिज़नेस खरीदना है, तो अगला कदम उसे खोजना है। मौजूदा बिज़नेस खरीदने के लिए ऑनलाइन मार्केटप्लेस और बिज़नेस ब्रोकरेज वेबसाइटों सहित कई जगहें उपलब्ध हैं।
- भरोसेमंद प्लेटफॉर्म देखें: Flippa और BizBuySale जैसे मार्केटप्लेस पर अलग-अलग तरह के बिज़नेसेज़ की लिस्टिंग मिल सकती है। आप वित्तीय प्रदर्शन, लोकेशन और इंडस्ट्री जैसे मानदंडों के आधार पर अपनी खोज को सीमित कर सकते हैं।
- स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल करें: अपने शहर के बिज़नेस नेटवर्क, इंडस्ट्री एसोसिएशन या अपने पेशेवर संपर्कों से बात करें। इससे आपको ऐसी बिक्री के अवसरों की जानकारी मिल सकती है जो सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध नहीं हैं।
आपको अलग-अलग बिज़नेस मॉडल को भी समझना चाहिए। इनमें शामिल हैं:
- होलसेल और B2B: ऐसे होलसेल बिज़नेस जो व्यक्तिगत ग्राहकों के बजाय दूसरे बिज़नेसेज़ को बड़ी मात्रा में प्रोडक्ट बेचते हैं।
- ईकॉमर्स स्टोर: ऑनलाइन स्टोर जो इंटरनेट के जरिए सीधे ग्राहकों को प्रोडक्ट बेचते हैं।
- विज्ञापन या एफिलिएट आधारित बिज़नेस: ऐसी वेबसाइटें जो विज्ञापन और एफिलिएट मार्केटिंग लिंक से कमाई करती हैं।
- इन्वेंट्री-आधारित बिज़नेस: ऐसे ऑनलाइन या ऑफलाइन बिज़नेस जिनमें बड़ी मात्रा में भौतिक स्टॉक को मैनेज करना पड़ता है।
पता करें कि बिज़नेस क्यों बेचा जा रहा है
किसी बिज़नेस को बेचने का कारण जानना खरीद प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कभी-कभी वजह बिल्कुल स्पष्ट होती है, जैसे मालिक का रिटायर होना या किसी दूसरे बिज़नेस पर ध्यान केंद्रित करना। लेकिन कुछ मामलों में असली कारण तुरंत स्पष्ट नहीं होता और आपकी जाँच-पड़ताल के दौरान संभावित समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
जानकारी जुटाते समय इन बातों पर ध्यान दें:
- मौजूदा मालिक से बात करें: सीधे बातचीत करने से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो सिर्फ वित्तीय रिकॉर्ड या वेबसाइट देखकर समझ में नहीं आती।
- वित्तीय रिकॉर्ड देखें: कैश फ्लो स्टेटमेंट और पिछले वर्षों का वित्तीय प्रदर्शन माँगें। यह भी पता करें कि बिज़नेस पर कोई बकाया कर्ज या देयताएँ (liabilities) तो नहीं हैं।
- ऑपरेशनल समस्याओं के बारे में पूछें: सप्लाई की समस्याएँ, उपकरणों की स्थिति, कर्मचारियों से जुड़े खर्च और वर्किंग कैपिटल जैसे सवाल आपको बताएँगे कि बिज़नेस वास्तव में कितनी अच्छी तरह चल रहा है।
- बिज़नेस प्लान देखें: बिज़नेस प्लान से आपको मालिक की रणनीति, लक्ष्य और भविष्य की दिशा समझने में मदद मिलेगी। इससे यह भी पता चल सकता है कि बिज़नेस अपने लक्ष्यों को हासिल कर रहा है या बाजार में बदलाव के अनुसार खुद को ढाल रहा है।
- सोशल मीडिया और ऑनलाइन मौजूदगी जाँचें: वेबसाइट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मार्केटप्लेस और ग्राहक प्रतिक्रिया देखें। इससे बिज़नेस की प्रतिष्ठा, ऑनलाइन बिक्री और ग्राहक जुड़ाव के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।
बिज़नेस की सही कीमत तय करें
किसी बिज़नेस को खरीदने का निर्णय लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि उसकी वास्तविक कीमत कितनी है। केवल विक्रेता द्वारा बताई गई लिस्टिंग कीमत पर भरोसा न करें। स्वतंत्र रूप से बिज़नेस वैल्यूएशन करवाएँ।
इससे आपको बातचीत के दौरान बेहतर तैयारी करने और अपने निवेश के बारे में अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद मिलती है।
बिज़नेस वैल्यूएशन के कई तरीके होते हैं। बिज़नेस ब्रोकर आपको किसी योग्य अकाउंटेंट, चार्टर्ड अकाउंटेंट या वैल्यूएशन विशेषज्ञ से संपर्क कराने में मदद कर सकता है।
Walmart द्वारा Flipkart का अधिग्रहण यह स्पष्ट करता है कि किसी भी कंपनी की वास्तविक वैल्यू केवल उसकी मौजूदा बिक्री या रेवेन्यू से नहीं, बल्कि उसकी मार्केट पोज़िशन, यूज़र बेस, टेक्नोलॉजी और भविष्य की संभावनाओं से तय होती है; ठीक यही सिद्धांत छोटे और मध्यम व्यवसायों पर भी लागू होता है, जहाँ खरीदार को सेलर द्वारा तय कीमत पर सीधे भरोसा करने के बजाय मुनाफ़ा, कैश फ्लो, देनदारियों और कस्टमर कंसंट्रेशन की स्वतंत्र जांच-पड़ताल ज़रूर करनी चाहिए।
फाइनेंसिंग प्लान बनाएँ
जब आप बिज़नेस खरीदने के लिए तैयार हों, तो अगला सवाल होता है, इसके लिए पैसे की व्यवस्था कैसे की जाए?
पूरी खरीद कीमत अपनी जेब से देना हमेशा जरूरी नहीं होता। बिज़नेस खरीदने के लिए अलग-अलग फाइनेंसिंग विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
बिज़नेस खरीदने के लिए फंड जुटाने के कुछ सामान्य तरीके हैं:
- बैंक लोन: बैंक आपको एक निश्चित राशि उधार देता है, जिसे आपको तय शर्तों के अनुसार समय के साथ चुकाना होता है। भारत में बैंक आम तौर पर आवेदक के क्रेडिट प्रोफाइल, आय, बिज़नेस की वित्तीय स्थिति, कैश फ्लो और अन्य पात्रता मानदंडों को देखते हैं।
- सेलर फाइनेंसिंग: इस व्यवस्था में मौजूदा मालिक ही खरीदार को बिज़नेस खरीदने के लिए कुछ या पूरी रकम उधार देता है। खरीदार तय शर्तों के अनुसार समय के साथ उस राशि का भुगतान करता है। यह विकल्प तब उपयोगी हो सकता है जब पारंपरिक फाइनेंसिंग प्राप्त करना मुश्किल हो।
- Accounts Receivable Financing (प्राप्य खातों की फाइनेंसिंग): अगर किसी बिज़नेस में नियमित B2B इनवॉइस या ग्राहकों से मिलने वाली बकाया राशि है, तो कुछ वित्तीय संस्थानों के माध्यम से इनके आधार पर वर्किंग कैपिटल जुटाया जा सकता है। इसकी उपलब्धता, पात्रता और शर्तें संबंधित लेंडर तथा बिज़नेस की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करती हैं। उपलब्धता और शर्तें वित्तीय संस्थान और बिज़नेस की स्थिति पर निर्भर करती हैं।
- सरकारी या MSME फाइनेंसिंग योजनाएँ: भारत में पात्र छोटे बिज़नेसेज़ के लिए विभिन्न सरकारी और बैंक-समर्थित फाइनेंसिंग योजनाएँ उपलब्ध हो सकती हैं। पात्रता, गारंटी और लोन की शर्तें योजना और ऋणदाता के अनुसार अलग-अलग होती हैं।
- अन्य संस्थागत फाइनेंसिंग: बैंक के अलावा NBFC और अन्य अधिकृत वित्तीय संस्थान भी बिज़नेस के लिए फंडिंग विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, गारंटी, पुनर्भुगतान अवधि और कुल लागत की तुलना करें।
कीमत कम कराने की कोशिश करें
अब जब आपने बिज़नेस की जाँच-पड़ताल और वैल्यूएशन कर लिया है, तो अगला कदम है कि आप उस कीमत पर बातचीत करें जो आप बिज़नेस के लिए भुगतान करने को तैयार हैं।
आप और विक्रेता के बीच ऑफर और काउंटर-ऑफर का दौर चल सकता है। इसी दौरान बिक्री की सामान्य शर्तें भी तय होती हैं, जैसे आप बिज़नेस की कौन-सी संपत्तियाँ खरीद रहे हैं, इन्वेंट्री शामिल है या नहीं और मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट का क्या होगा।
बातचीत करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- अपने वैल्यूएशन को आधार बनाएँ: आपके द्वारा किया गया बिज़नेस का वैल्यूएशन शुरुआती ऑफर का आधार होना चाहिए। इससे आपका ऑफर वास्तविक वित्तीय जानकारी पर आधारित रहेगा।
- समझौते के लिए तैयार रहें: किसी भी बातचीत में ठीक वही कीमत मिलना जरूरी नहीं है जो आपने शुरुआत में सोची थी। कीमत या दूसरी शर्तों में बदलाव करके ऐसा समझौता किया जा सकता है जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।
- विक्रेता की वजह समझें: अगर आपको पता है कि मालिक बिज़नेस क्यों बेच रहा है, तो आप उसी के अनुसार अपने ऑफर की शर्तें तय कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर विक्रेता जल्दी बिक्री पूरी करना चाहता है, तो समयबद्ध क्लोजिंग उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
- एसेट खरीद रहे हैं या पूरी कंपनी: तय करें कि आप बिज़नेस की संपत्तियाँ और ऑपरेशनल एसेट खरीद रहे हैं या कंपनी में हिस्सेदारी/शेयर खरीद रहे हैं। इस फैसले से कानूनी प्रक्रिया, टैक्स और संभावित देनदारियों पर असर पड़ सकता है।
- बातचीत सम्मानजनक रखें: अच्छी बातचीत का उद्देश्य केवल कीमत कम करना नहीं होता। दोनों पक्षों के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक शर्तें तय करना भी जरूरी है। इससे बिज़नेस ट्रांजिशन के बाद संबंध बेहतर बने रह सकते हैं।
Letter of Intent (LOI) जमा करें
जब आप बिज़नेस खरीदने को लेकर गंभीर हों, तो अपनी मंशा लिखित रूप में रखना समझदारी है। यहीं Letter of Intent (LOI) उपयोगी होता है। LOI आम तौर पर अंतिम कॉन्ट्रैक्ट से पहले प्रस्तावित सौदे की मुख्य शर्तों पर दोनों पक्षों की समझ स्पष्ट करता है।
आमतौर पर LOI में ये बातें शामिल हो सकती हैं:
- शामिल पक्ष: कौन खरीद रहा है और कौन बेच रहा है, यह स्पष्ट रूप से लिखें।
- सौदे की सामान्य शर्तें: आप क्या खरीदना चाहते हैं और खरीद की मुख्य शर्तें क्या होंगी, इसका उल्लेख करें।
- आवश्यकताएँ और प्रतिबंध: अगर कुछ जानकारी गोपनीय रखनी है, तो गोपनीयता समझौते (confidentiality agreement) जैसी शर्तें शामिल की जा सकती हैं।
- समयसीमा: मुख्य तारीखें तय करने से पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित रहती है, जैसे विस्तृत Purchase Agreement कब तक साइन होना है।
कानूनी और वित्तीय दस्तावेज़ों की समीक्षा करें
दोनों पक्षों द्वारा LOI पर हस्ताक्षर करने के बाद बिज़नेस के आधिकारिक दस्तावेज़ों की गहराई से जाँच करें। अंतिम खरीद से पहले यह सुनिश्चित करने का यह एक और महत्वपूर्ण चरण है कि आपको पता है कि आप वास्तव में क्या खरीद रहे हैं।
जाँच किए जाने वाले दस्तावेज़ों में शामिल हो सकते हैं:
- प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज़, जैसे कमर्शियल लीज़ या किराये से जुड़े रिकॉर्ड।
- बिज़नेस पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज़।
- उद्योग या स्थान के अनुसार आवश्यक लाइसेंस।
- मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट और यह जानकारी कि उन्हें नए मालिक को ट्रांसफर किया जा सकता है या नहीं।
- मार्केटिंग और विज्ञापन सामग्री।
- पिछले तीन वर्षों के बिज़नेस टैक्स रिटर्न।
- कंपनी/फर्म के गठन से जुड़े दस्तावेज़, सर्टिफिकेट और बिज़नेस लाइसेंस।
- मौजूदा इनकम स्टेटमेंट, पेरोल रिकॉर्ड, बैलेंस शीट और कैश फ्लो स्टेटमेंट।
- बिज़नेस लोन और कर्ज से जुड़ी जानकारी।
- लंबित मुकदमों सहित कोई भी कानूनी रिकॉर्ड।
अपने बिज़नेस अधिग्रहण के अनुभव को याद करते हुए मोना बताती हैं कि उन्हें वित्तीय स्टेटमेंट की समीक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए था।
“काश मुझे प्रॉफिट मार्जिन की बेहतर समझ होती। जब प्रोडक्ट कम होते हैं तो यह समझना आसान होता है, लेकिन हमारे जैसे 500 से ज्यादा प्रोडक्ट वाले स्टोर में यह अधिक चुनौतीपूर्ण है।”
कौन-से प्रोडक्ट बेहतर मार्जिन देते हैं, यह जानना बजट, खरीद ऑर्डर, विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च तथा अंततः मुनाफे को समझने में मदद करता है।
डील पूरी करें
अब आपने रिसर्च कर ली है, जरूरी बातचीत कर ली है और दस्तावेज़ों की जाँच भी कर ली है। अगला कदम अधिग्रहण को अंतिम रूप देना है। Purchase Agreement वह कानूनी दस्तावेज़ होता है जो सौदे को अंतिम रूप देता है। इसमें खरीदार और विक्रेता के बीच सहमत शर्तें लिखी होती हैं।
डील को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए:
- बिज़नेस वकील से सलाह लें: किसी योग्य कानूनी विशेषज्ञ से Purchase Agreement की समीक्षा करवाएँ। वे यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं कि सहमत शर्तें सही तरीके से कॉन्ट्रैक्ट में शामिल हों और आपके हित सुरक्षित रहें।
- फंड सुरक्षित रखें: यदि खरीदारी के लिए फाइनेंसिंग ली जा रही है, तो ऋणदाता या संबंधित पक्ष के साथ भुगतान व्यवस्था पहले से स्पष्ट करें। क्रॉस-बॉर्डर लेन-देन में एस्क्रो (escrow) की ज़रूरत और उसकी उपलब्धता अलग-अलग हो सकती है। भारत में किसी भी एस्क्रो व्यवस्था का इस्तेमाल करने से पहले यह ज़रूर जांच लें कि सर्विस प्रोवाइडर, पेमेंट का तरीका और डील का स्ट्रक्चर आपके सौदे के अनुकूल हों और सभी कानूनी नियमों का पूरी तरह पालन करते हों।
- कानूनी दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करें: Purchase Agreement और अन्य जरूरी दस्तावेज़ों की सभी शर्तें समझने के बाद ही हस्ताक्षर करें।
- फंड ट्रांसफर पूरा करें: सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने और दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर होने के बाद सहमत प्रक्रिया के अनुसार भुगतान विक्रेता को किया जाता है। इसके बाद स्वामित्व का हस्तांतरण पूरा किया जाता है।
अंतिम चरण में जल्दबाज़ी न करें। Ecommerce Brokers के CEO George Moulos की सलाह है: “अगर किसी अधिग्रहण को बहुत जल्दबाज़ी में पूरा किया जा रहा हो और आपको लग रहा हो कि यह आपके लिए सही सौदा नहीं है, तो याद रखें कि भविष्य में दूसरे अच्छे अवसर भी मिल सकते हैं।”
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आइडिया खोजने से लेकर अपने ऑनलाइन बिज़नेस से फुल-टाइम इनकम कमाने तक काफी काम करना पड़ता है। ऑनलाइन बिक्री शुरू करने में मदद के लिए इन नौ चरणों को देखें।
ऑनलाइन बिज़नेस कहाँ खरीदें
भारत में कोई ऑनलाइन बिज़नेस खरीदने के लिए आप ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स के साथ-साथ भारत-केंद्रित बिज़नेस मार्केटप्लेस भी देख सकते हैं। किसी भी प्लेटफॉर्म को चुनते समय यह ज़रूर परख लें कि वहाँ भारतीय बिज़नेस की पर्याप्त लिस्टिंग मौजूद है या नहीं। साथ ही यह भी देखें कि वे डील के लेन-देन, पेमेंट, ओनरशिप ट्रांसफर और ड्यू डिलिजेंस (जांच-पड़ताल) में किस तरह की मदद मुहैया कराते हैं।
ध्यान दें: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे किसी कानूनी, टैक्स, वित्तीय या M&A सलाह के रूप में न देखें। बिज़नेस खरीदने की प्रक्रिया, टैक्स, लाइसेंस, कंपनी का स्ट्रक्चर, फाइनेंसिंग, शेयर या एसेट ट्रांसफर और अन्य कानूनी नियम आपके बिज़नेस के प्रकार, लोकेशन और डील के स्ट्रक्चर के हिसाब से अलग हो सकते हैं। भारत में कोई भी बिज़नेस खरीदने से पहले किसी योग्य सीए (CA), टैक्स सलाहकार, वकील या M&A एक्सपर्ट से राय ज़रूर लें। साथ ही, मौजूदा नियमों और शर्तों की पुष्टि संबंधित सरकारी व वित्तीय संस्थानों से कर लें। किसी भी मार्केटप्लेस, सेलर या फाइनेंसिंग देने वाले की जानकारी पर अपने स्तर पर पूरी जांच-पड़ताल ज़रूर करें।
Flippa

Flippa पर भारत से जुड़े बिज़नेस और ऑनलाइन एसेट्स भी मिल सकते हैं। हालांकि, किसी भी लिस्टिंग को खरीदने से पहले उसके ट्रैफिक, रेवेन्यू, प्रॉफिट, ग्राहक आधार, पेमेंट प्रोसेस और कानूनी दस्तावेज़ों की स्वतंत्र रूप से जाँच करें।
लिस्टिंग में अक्सर बिज़नेस के प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी, जैसे ट्रैफिक और रेवेन्यू डेटा, दी जाती है।
Empire Flippers

Empire Flippers एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन मार्केटप्लेस है, इसलिए यहाँ उपलब्ध कई बिज़नेस लिस्टिंग भारत के बाहर स्थित व्यवसायों की हो सकती हैं। भारतीय खरीदारों को खरीदारी से पहले बिज़नेस का देश, भुगतान व्यवस्था, टैक्स संबंधी दायित्व, सप्लायर संबंध, प्लेटफ़ॉर्म अकाउंट और व्यवसाय के स्वामित्व के हस्तांतरण की शर्तों की अलग से अच्छी तरह जाँच करनी चाहिए।
BizBuySell

BizBuySell मुख्य रूप से अमेरिका में बिक्री के लिए उपलब्ध छोटे और मध्यम आकार के बिज़नेस का ऑनलाइन मार्केटप्लेस है। भारत से बिज़नेस खरीदने वाले पाठकों के लिए यहाँ की लिस्टिंग तभी प्रासंगिक होंगी, जब वे अमेरिका में स्थित किसी बिज़नेस को खरीदना चाहते हों। किसी अमेरिकी बिज़नेस को खरीदने से पहले स्थानीय टैक्स नियमों, कानूनी आवश्यकताओं, स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय भुगतान से जुड़ी शर्तों की अच्छी तरह जाँच कर लें।
Acquire

Acquire.com खास तौर पर SaaS, टेक्नोलॉजी और अन्य ऑनलाइन बिज़नेस की खरीद-बिक्री के लिए उपयोगी एक ग्लोबल मार्केटप्लेस है। भारतीय खरीदार यहाँ अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस की लिस्टिंग देख सकते हैं, लेकिन किसी विदेशी बिज़नेस को खरीदने से पहले मुद्रा विनिमय, टैक्स दायित्व, लागू कानूनी क्षेत्राधिकार और स्वामित्व हस्तांतरण जैसी अतिरिक्त बातों की अच्छी तरह जाँच करना जरूरी है।
SMERGERS
भारत में बिज़नेस खरीदने और बेचने के लिए SMERGERS एक उपयोगी ऑनलाइन मार्केटप्लेस है, जहाँ अलग-अलग इंडस्ट्री और शहरों में बिक्री के लिए उपलब्ध बिज़नेस की लिस्टिंग मिल सकती हैं। भारतीय खरीदारों के लिए यह स्थानीय बिज़नेस, ईकॉमर्स स्टोर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और सर्विस-आधारित बिज़नेस खोजने का एक विकल्प हो सकता है।
IndiaBizForSale
IndiaBizForSale भारत में SMEs और स्टार्टअप्स से जुड़ी बिज़नेस बिक्री, निवेश और M&A (Merger & Acquisition) अवसरों को खोजने के लिए बनाया गया एक प्लेटफ़ॉर्म है। यहाँ खरीदार और निवेशक लोकेशन, इंडस्ट्री और निवेश राशि के आधार पर उपलब्ध अवसरों को फ़िल्टर करके खोज सकते हैं।
और पढ़ें: ऑनलाइन बिज़नेस खरीदने के लिए 11 बेहतरीन मार्केटप्लेस संदर्भ.
बिज़नेस क्यों खरीदें?
शुरू से नया बिज़नेस बनाने के बजाय मौजूदा बिज़नेस खरीदने से कई संभावित फायदे मिल सकते हैं।
स्टार्टअप की शुरुआती मेहनत से बचें
नया बिज़नेस शुरू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आपको ब्रांड बनाने, प्रोडक्ट विकसित करने, वेबसाइट तैयार करने और बैक-ऑफिस सिस्टम स्थापित करने जैसे कई काम करने पड़ते हैं।
जब आप पहले से स्थापित बिज़नेस खरीदते हैं, तो बिज़नेस शुरू करने की शुरुआती नींव का एक बड़ा हिस्सा पहले से तैयार हो सकता है। आपको मौजूदा सिस्टम को समझकर उसे आगे बढ़ाने पर ध्यान देना होता है।
तुरंत बिक्री शुरू करने का अवसर
मौजूदा बिज़नेस खरीदने का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि बिज़नेस पहले से बिक्री कर रहा होता है। यानी शुरुआत से शून्य बिक्री पर काम करने के बजाय आप मौजूदा ऑपरेशन को बढ़ाने पर ध्यान दे सकते हैं।
Detour Coffee Roasters के मालिक Alex Yurek ने मौजूदा बिज़नेस खरीदने को ब्रांड बनाने का अवसर माना। उनके अनुसार “ब्रांड को नए रूप में विकसित करने, डिजिटल गतिविधियों को बढ़ाने और संगठन को ग्रोथ मोड में लाने के लिए बहुत सारे अवसर थे।”
मौजूदा ग्राहक आधार का लाभ उठाएँ
स्थापित बिज़नेस खरीदने पर आपको अक्सर पहले से मौजूद ग्राहक आधार तक पहुँच मिल सकती है। यह बिज़नेस चलाने में एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल फायदा हो सकता है। डिजिटल कंसल्टेंट Rob Weatherhead बताते हैं “मौजूदा बिज़नेस खरीदने से हमें पहले से मौजूद ग्राहक डेटाबेस, कुछ नियमित ग्राहक और ऐसी व्यवस्था मिली जिससे हम पहले दिन से ऑपरेशन शुरू कर सके।”
मूल्यवान अमूर्त संपत्तियाँ हासिल करें
किसी बिज़नेस को खरीदते समय आपको केवल ग्राहक या इन्वेंट्री ही नहीं मिलती। आपको पेटेंट, ब्रांड की प्रतिष्ठा, ग्राहक वफादारी, वेबसाइट, डोमेन और अन्य अमूर्त संपत्तियाँ भी मिल सकती हैं। इन संपत्तियों को शून्य से बनाने में कई साल लग सकते हैं।
विस्तार के अवसर
मौजूदा बिज़नेस खरीदने का मतलब केवल वर्तमान ऑपरेशन को जारी रखना नहीं है। यह बिज़नेस को आगे बढ़ाने और उसमें नए अवसर जोड़ने का मौका भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, आप किसी मौजूदा ऑनलाइन बिज़नेस को वैश्विक ग्राहकों तक ले जा सकते हैं या उपयुक्त होने पर ऑनलाइन मॉडल के साथ ऑफलाइन स्टोर भी शुरू कर सकते हैं।
बिज़नेस खरीदने से पहले किन बातों पर विचार करें
किसी बिज़नेस को खरीदने से पहले एक चेकलिस्ट बनाना आपकी जाँच-पड़ताल को व्यवस्थित कर सकता है। इन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दें ताकि खरीदारी से पहले आपको बिज़नेस की स्थिति की स्पष्ट तस्वीर मिल सके।
इन्वेंट्री
देखें कि बिज़नेस के पास कौन-कौन से प्रोडक्ट स्टॉक में हैं और इन्वेंट्री की वास्तविक कीमत कितनी है। अगर बिज़नेस की लिस्टिंग में “business plus stock at value” जैसी शर्त लिखी है, तो यह स्पष्ट करें कि कीमत में कौन-कौन सा स्टॉक शामिल है। यह भी सोचें कि मौजूदा इन्वेंट्री आपके भविष्य के बिज़नेस मॉडल और रणनीति के अनुरूप है या नहीं।
उपकरण
सुनिश्चित करें कि बिज़नेस चलाने के लिए जरूरी उपकरण बिक्री में शामिल हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप कपड़े बनाने वाले बिज़नेस को खरीद रहे हैं और उसके संचालन के लिए स्क्रीन-प्रिंटिंग मशीन जरूरी है, तो यह स्पष्ट करें कि मशीन सौदे का हिस्सा है या नहीं। कुछ उपकरण लीज़ या फाइनेंस पर हो सकते हैं। ऐसे मामले में उनके बकाया भुगतान या अन्य दायित्व आपके ऊपर आ सकते हैं, इसलिए कॉन्ट्रैक्ट की समीक्षा जरूर करें।
टैक्स रिटर्न और वित्तीय रिकॉर्ड
किसी बिज़नेस के वित्तीय स्टेटमेंट से उसके प्रदर्शन की बेहतर समझ मिलती है। मौजूदा मालिक से पिछले कई वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड माँगें, जिनमें बैलेंस शीट, Profit and Loss Statements, टैक्स रिटर्न और अन्य संबंधित रिकॉर्ड शामिल हों। भारत में लागू होने वाले GST रिकॉर्ड, आयकर रिटर्न और अन्य संबंधित वित्तीय/टैक्स दस्तावेज़ भी बिज़नेस की संरचना और लागू नियमों के अनुसार जाँचे जा सकते हैं।
बिक्री के रिकॉर्ड
Sales records due diligence का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्योंकि वे यह सत्यापित करने में मदद करते हैं कि बिज़नेस ने वास्तव में कितना राजस्व अर्जित किया है।
बिक्री लेनदेन का विश्लेषण करके Customer Acquisition Cost, ग्राहक दोबारा खरीदते हैं या नहीं और Customer Retention जैसे मेट्रिक्स को समझें।
Sales records से आपको यह अंदाज़ा लगाने में भी मदद मिलेगी कि बिज़नेस का अधिग्रहण करने के बाद आपके पास कितनी वित्तीय गुंजाइश होगी। Rob Weatherhead के अनुसार “हमने खरीदारी के बाद बिज़नेस में दोबारा निवेश के लिए पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश नहीं रखी थी। मौजूदा बिज़नेस खरीदने के बाद भी चीज़ों को गति पकड़ने में समय लगता है, इसलिए कुछ रिज़र्व फंड अलग रखना उपयोगी है।”
कर्ज की पूरी जानकारी लें
कंपनी खरीदने पर सहमत होने से पहले विक्रेता से बिज़नेस से जुड़े सभी कर्ज और वित्तीय दायित्वों की जानकारी माँगें। यह स्पष्ट करें कि कौन-से कर्ज बिज़नेस के साथ ट्रांसफर होंगे और कौन-से विक्रेता द्वारा निपटाए जाएँगे।
कंपनी का Business Credit Score और उपलब्ध क्रेडिट रिकॉर्ड भी जाँचें। यदि बिज़नेस के पुराने भुगतान बकाया रहे हैं, तो भविष्य में फाइनेंसिंग प्राप्त करने में अधिक ब्याज दर या अन्य कठिनाइयाँ सामने आ सकती हैं।
बिज़नेस खरीदने से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या Shopify Exchange Marketplace अभी भी उपलब्ध है?
नहीं। 1 नवंबर, 2022 से Shopify Exchange Marketplace ने बिक्री की प्रक्रिया करना बंद कर दिया था।
इसलिए Shopify Exchange को मौजूदा Shopify बिज़नेस खरीदने के सक्रिय मार्केटप्लेस के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
Franchising और बिज़नेस खरीदने में क्या अंतर है?
बिज़नेस खरीदने का मतलब किसी मौजूदा कंपनी या बिज़नेस का स्वामित्व हासिल करना है। इसमें बिज़नेस की संपत्तियाँ, ग्राहक, इन्वेंट्री और अन्य शामिल एसेट सौदे की शर्तों के अनुसार खरीदे जा सकते हैं।
दूसरी ओर, Franchising में आप किसी स्थापित ब्रांड के नाम के तहत बिज़नेस चलाने के अधिकार खरीदते हैं। आपको ब्रांड की पहचान, बिज़नेस मॉडल और कुछ सिस्टम का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है, लेकिन आपको फ्रेंचाइज़र द्वारा निर्धारित कई नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होता है।
मुख्य अंतर स्वामित्व और नियंत्रण का है। किसी बिज़नेस को खरीदने पर आपको सौदे की संरचना के अनुसार अधिक प्रत्यक्ष स्वामित्व और निर्णय लेने का अधिकार मिल सकता है, जबकि फ्रेंचाइज़ मॉडल में कई ऑपरेशनल फैसले फ्रेंचाइज़र के नियमों से प्रभावित होते हैं।
मौजूदा बिज़नेस का अधिग्रहण कैसे करें?
बिज़नेस खरीदने की प्रक्रिया को इन चरणों में बाँटा जा सकता है:
- तय करें कि आप किस प्रकार का बिज़नेस खरीदना चाहते हैं।
- बिक्री के लिए उपलब्ध बिज़नेस खोजें।
- पता करें कि मालिक बिज़नेस क्यों बेच रहा है।
- बिज़नेस की वास्तविक कीमत का अनुमान लगाएँ।
- अपनी फाइनेंसिंग और फंडिंग की व्यवस्था करें।
- खरीद कीमत और अन्य शर्तों पर बातचीत करें।
- Letter of Intent तैयार करके हस्ताक्षर करें।
- संबंधित कानूनी और वित्तीय दस्तावेज़ों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें।
- Purchase Agreement पर हस्ताक्षर करके डील को अंतिम रूप दें और स्वामित्व हस्तांतरण पूरा करें।
क्या मौजूदा बिज़नेस खरीदना एक अच्छा विकल्प है?
किसी बिज़नेस को खरीदने से पहले उसकी वित्तीय स्थिति, ग्राहक आधार, ब्रांड, इन्वेंट्री, कर्ज, कानूनी दायित्व, टैक्स रिकॉर्ड और भविष्य की विकास संभावनाओं की स्वतंत्र जाँच करना जरूरी है।
यदि आप किसी कंपनी में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करना चाहते हैं, तो आम तौर पर आपको कंपनी की पर्याप्त इक्विटी/शेयर हासिल करने होंगे। वास्तविक आवश्यकता कंपनी की कानूनी संरचना और खरीद समझौते पर निर्भर करती है।
बिज़नेस खरीदने के लिए कितने प्रतिशत हिस्से की जरूरत होती है?
अगर आप किसी कंपनी का केवल एक हिस्सा खरीद रहे हैं, तो कोई एक सार्वभौमिक न्यूनतम प्रतिशत लागू नहीं होता।
लेकिन किसी कंपनी पर नियंत्रण हासिल करने या स्वामित्व हस्तांतरित करने के लिए आवश्यक हिस्सेदारी कंपनी की संरचना, शेयरधारकों के समझौते और लागू कानूनों पर निर्भर करेगी।
इसलिए किसी अधिग्रहण से पहले कंपनी की कानूनी संरचना और शेयरहोल्डिंग व्यवस्था की समीक्षा किसी योग्य कानूनी सलाहकार से करवाना महत्वपूर्ण है।
बिज़नेस खरीदने के लिए पैसे की व्यवस्था कैसे करें?
बिज़नेस खरीदने के लिए फाइनेंसिंग के कई तरीके हो सकते हैं, जैसे:
- Seller financing (विक्रेता द्वारा वित्तपोषण): मौजूदा मालिक खरीद कीमत का कुछ हिस्सा फाइनेंस करता है और खरीदार तय समय में भुगतान करता है।
- बैंक लोन: पात्रता के आधार पर बैंक से बिज़नेस खरीदने के लिए फाइनेंसिंग ली जा सकती है।
- Accounts receivable financing (प्राप्य खातों की फाइनेंसिंग): भविष्य में मिलने वाले भुगतान या बकाया इनवॉइस के आधार पर फंडिंग प्राप्त की जा सकती है।
- सरकारी/MSME फाइनेंसिंग: पात्र बिज़नेस भारत में उपलब्ध संबंधित सरकारी या बैंक-समर्थित योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- NBFC और अन्य वित्तीय संस्थान: कुछ बिज़नेसेज़ के लिए वैकल्पिक बिज़नेस फाइनेंसिंग उपलब्ध हो सकती है।
फाइनेंसिंग विकल्प चुनने से पहले ब्याज दर, कुल लागत, संपार्श्विक/गारंटी, पुनर्भुगतान अवधि और बिज़नेस के कैश फ्लो पर प्रभाव को ध्यान से समझें।

